Maayedo

Maayedo

वह रात्रि अनजानी थी

चाँदनी रात में चेरी ब्लॉसम के वृक्षों, जुगनुओं और धुँधले पथ के बीच प्रकृति का शांत सौंदर्य।

क्या प्रकृति का सौंदर्य हमारे मन और भावनाओं को प्रभावित करता है? • • • वह शाम अनोखी थी… सपनों में लिपटी थी,खुशबू समेटे थी,रंगों से सँवरी थी,धुनों में पिरोई थी… चाँदनी की कोमल आभा मेंकुछ अनकही…कुछ अनजानी-सी। जैसे मुझसे…

वह कल जो कभी आया ही नहीं

जल की सतह पर तैरते चेरी ब्लॉसम के पुष्प और पंखुड़ियाँ, जिन पर ओस की बूंदें और सुनहरी प्रकाश की झिलमिलाहट दिखाई दे रही है

क्यों हम अपने आज को कल के भरोसे टाल देते हैं • • • मैंने सोचा, वक़्त मेरे लिए ठहर जाएगा। फिर मैंने सोचा— मेरे लिए ही क्यों ठहरेगा वक़्त? मुझमें ऐसा क्या है, जो उसकी निरंतर बहती धारा को…

तेरी बारी, मेरी बारी — समय का अनंत खेल

वृद्धावस्था पर कविता – soft petals in golden light reflecting time, life, and aging

उम्र, समय और जीवन के बदलते पड़ावों पर एक सूक्ष्म चिंतन • • • वह आई…धीरे-धीरे, जैसे कोई धुन दूर से पास आती हो—अनकही, अनसुनी…फिर भी जानी-पहचानी। कहीं दूर…जब उसे चुपके से आते देखा—तो मन ही मन सोचा…अभी नहीं… अभी…

वह गीत जो मेरा कभी था ही नहीं

abstract silhouette with warm lights, flowing threads and subtle music symbols, reflecting माया and inner ठहराव

माया और भ्रम के सूक्ष्म अनुभवों में ठहरे…कभी-कभी हम उस धुन में खो जाते हैं—जो कभी हमारी थी ही नहीं। वह गीत…जो पहली बार केवल एक धुन था,अब एक ठहराव बन चुका था।मैं उसे सुनता नहीं था,उसमें ठहर जाता था।हर…