Category Bodh

वृद्धावस्था पर कविता – soft petals in golden light reflecting time, life, and aging

तेरी बारी, मेरी बारी — समय का अनंत खेल

उम्र, समय और जीवन के बदलते पड़ावों पर एक सूक्ष्म चिंतन • • • वह आई…धीरे-धीरे, जैसे कोई धुन दूर से पास आती हो—अनकही, अनसुनी…फिर भी जानी-पहचानी। कहीं दूर…जब उसे चुपके से आते देखा—तो मन ही मन सोचा…अभी नहीं… अभी…